रेलवे स्टेशन पर उतरी तो उसे देख हक्का बक्का रह गई मैं तो ! रंगत वही दूधिया, बाल वही जैसे घनघोर सावन की संवलाई घटा और पसंद वही कलफ लगा बड़ा कड़क दुपट्टा , हवा को चुनौती देता था.
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